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Oct. 14, 2016

मेरे बचपन की यादें

मेरे बचपन की यादें

by Parul Mishra

बचपन के दिन किसी भी व्यक्ति के जीवन के बड़े महत्वपूर्ण दिन होते हैं । बचपन में सभी व्यक्ति चिंतामुक्त जीवन जीते हैं । खेलने उछलने-कूदने, खाने-पीने में बड़ा आनंद आता है ।

माता-पिता, दादा-दादी तथा अन्य बड़े लोगों का प्यार और दुलार बड़ा अच्छा लगता हैं । हमउम्र बच्चों के साथ खेलना-कूदना परिवार के लोगों के साथ घूमना-फिरना बस ये ही प्रमुख काम होते हैं । सचमुच बचपन के दिन बड़े प्यारे और मनोरंजक होते हैं ।

मुझे अपने बाल्यकाल की बहुत-सी बातें याद हैं । इनमें से कुछ यादें प्रिय तो कुछ अप्रिय हैं । मेरे बचपन का अधिकतर समय गाँव में बीता है । गाँव की पाठशाला में बस एक ही शिक्षक थे । वे पाठ याद न होने पर बच्चों को कई तरह से दंड देते थे । मुझे भी उन्होंने एक दिन कक्षा में आधे घंटे तक एक पाँव पर खड़ा रहने का दंड दिया था । इस समय मुझे रोना आ रहा था जबकि मेरे कई साथी मुझे देखकर बार-बार हँस रहे थे । मैं बचपन में कई तरह की शरारतें किया करता था ।

छुट्टी के दिनों में दिन भर गुल्ली-डंडा खेलना, दोस्तों के साथ धमा-चौकड़ी मचाना, फिाई का ढेला, ईंट आदि फेंककर कच्चे आम तोड़ना, काँटेदार बेर के पेड़ पर चढ़ना आदि मेरे प्रिय कार्य थे । इन कार्यो में कभी-कभी चोट या खरोंच लग जाती थी । घर में पिताजी की डाँट पड़ती थी मगर कोई फिक्र नहीं 9 अगले दिन ये कार्य फिर शुरू ।

किसी दिन खेत में जाकर चने के कच्चे झाडू उखाड़ लेता था तो किसान की त्योरी चढ़ जाती थी वह फटकार कर दौड़ाने लगता था । भाग कर हम बच्चे अपने-अपने घर में छिप जाते थे । कभी किसी के गन्ने तोड़ लेना तो कभी खेतों से मटर के पौधे उखाड़ लेना न जाने इन कार्यों में क्यों बड़ा मजा आता था । एक बार मैं अपने मित्र के साथ गाँव के तालाब में नहाने गया ।

उस समय वहाँ और कोई नहीं था । मुझे तैरना नहीं आता था । परंतु नहाते-नहाते अचानक मैं तालाब में थोड़ा नीचे चला गया । पानी मेरे सिर के ऊपर तक आ गया । मैं घबरा गया । साँस लेने की चेष्टा में कई घूँट पानी पी गया ।



शीघ्र ही मेरे मित्र ने मुझे सहारा देकर जल से बाहर खींचा । इस तरह मैं बाल-बाल बचा । इस घटना का प्रभाव यह पड़ा कि इसके बाद मैं कभी भी तालाब में नहाने नहीं गया । यही कारण है कि अब तक मुझे तैरना नहीं आता है ।

बचपन की एक अन्य घटना मुझे अभी तक याद है । उन दिनों मेरी चौथी कक्षा की वार्षिक परीक्षा चल रही थी । हिंदी की परीक्षा में हाथी पर निबंध लिखने का प्रश्न आया था । निबंध लिखने के क्रम में मैंने ‘चल-चल मेरे हाथी’ वाली फिल्मी गीत की चार पंक्तियाँ लिख दीं ।

इसकी चर्चा पूरे विद्यालय में हुई । शिक्षकगण तथा माता-पिता सभी ने हँसते हुए मेरी प्रशंसा की । परंतु उस समय मेरी समझ में नहीं आया कि मैंने क्या अच्छा या बुरा किया । इस तरह बचपन की कई यादें ऐसी हैं जो भुलाए नहीं भूल सकतीं । इन मधुर स्मृतियों के कारण ही फिर से पाँच-सात वर्ष का बालक बनने की इच्छा होती है । परंतु बचपन में किसी को पता ही कहाँ चलता है कि ये उसके जीवन के सबसे सुनहरे दिन हैं ।


Oct. 14, 2016

पेड़ हमारा जीवन

पेड़ हमारा जीवन

by Parul Mishra

धूप बरखा पाला सहता,
फिर भी कुछ न किसी से कहता।
हम पर छाया करता पेड़,
हमको फल देता है पेड़।


Oct. 14, 2016

एक ही है हमारा भगवान

एक ही है हमारा भगवान

by Parul Mishra

एक हमारे ईश्वर अल्लाह।
एक हमारे राम रहीम,
एक हमारे मंदिर मसजिद,
एक हमारे कृष्ण करीम।।


Oct. 14, 2016

एक व्यक्ति की अच्छाई हर दिशा में फैलती है

एक व्यक्ति की अच्छाई हर दिशा में फैलती है

by Nitin Kumar

फूलों की सुगंध केवल वायु की दिशा में फैलती है. लेकिन एक व्यक्ति की अच्छाई हर दिशा में फैलती है.

मुझे पता नही
पाप और पुण्य क्या है !

बस इतना पता है
जिस कार्य से किसी का
दिल दु:खे वो पाप
और
किसी के चेहरे पे
हंसी आये वो पुण्य

जय श्री राम
"आपका दिन सुंदर व मंगलमय हो"


Oct. 11, 2016

आपको और आपके परिवार को दशहरा की बहुत-बहुत शुभ-कामनायें

आपको और आपके परिवार को दशहरा की बहुत-बहुत शुभ-कामनायें

by Nitin Kumar

आपको और आपके परिवार को दशहरा की बहुत-बहुत शुभ-कामनायें.
सुख, शान्ति एवम समृध्दि की
मंगलमयी कामनाओं के साथ
महानवमी और विजयदशमी की हार्दिक शुभकामनाएं !!


Oct. 11, 2016

नेहरू स्टेडियम रामलीला समिति रूडकी के रावण, कुंभकरण और मेघनाथ के पुतले

नेहरू स्टेडियम रामलीला समिति रूडकी के रावण, कुंभकरण और मेघनाथ के पुतले

by Vikas

ये तस्वीर हमें सुबह सुबह श्री विकास जी के माध्यम से प्राप्त हुई है ये नेहरू स्टेडियम रामलीला समिति रूडकी का पहला रावण दहन कार्यक्रम है
इससे पहले यहाँ पर बी. टी. गंज रामलीला समिति रूडकी का रावण दहन कार्यक्रम हुआ है जो इस बार अपना रावण दहन कार्यक्रम मालवीय चौक पर सम्पन करेंगे


Oct. 10, 2016

Ek baar jarur padhein...

Ek baar jarur padhein...

by Monu

Dosto hmare desh ki yeh sachayi hai.


Oct. 6, 2016

श्री सरस्वती मंदिर आई. आई. टी. रूडकी

श्री सरस्वती मंदिर आई. आई. टी. रूडकी

by Parul Mishra

A Temple dedicated to the Goddess Saraswati, near the football field in Saraswati Kunj, IIT Roorkee.


Oct. 5, 2016

श्री 1008 आदिनाथ जिनंबिम्ब पचंकल्याणक प्रतिष्ठा महामहोत्सव

श्री 1008 आदिनाथ जिनंबिम्ब पचंकल्याणक प्रतिष्ठा महामहोत्सव

by Paras Jain

श्री 1008 आदिनाथ जिनंबिम्ब पचंकल्याणक प्रतिष्ठा महामहोत्सव
रूडकी मे होने जा रहा है यह अपने आप ने ही बहुत बडा महोत्सव होगा
इसमे हमे उपध्याय श्री नयन सागर जी का सानिध्य प्राप्त होगा. यह आयोजन 9 दिसम्बर से 14 दिसम्बर तक चलेगा
यह आयोजन रूडकी मे बने नये जैन मंदिर जी मे होगा जो आर्दश नगर मे बन रहा हे


Oct. 3, 2016

बी टी गंज राम लीला समिति - 97वा मोहत्सव

बी टी गंज राम लीला समिति - 97वा मोहत्सव

by RoorkeeWeb

बी टी गंज राम लीला समिति - 97वा मोहत्सव - कंस कारागार झांकी का एक दृश्य