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Oct. 20, 2016

अपने गम भुला देती है माँ….

अपने गम भुला देती है माँ….

by RoorkeeWeb

हमारी खुशियोँ मेँ शामिल होकर, अपने गम भुला देती है माँ….
जब भी कभी ठोकर लगे, तो हमें तुरंत याद आती है माँ…..
दुनिया की तपिश में, हमें आँचल की शीतल छाया देती है माँ…..
खुद चाहे कितनी थकी हो, हमें देखकर अपनी थकान भूल जाती है माँ….


Oct. 20, 2016

पेड़ हमारे अच्छे दोस्त हैं

पेड़ हमारे अच्छे दोस्त हैं

by RoorkeeWeb

पेड़ हमारे अच्छे दोस्त हैं. वे हमारे जीवन में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. हम उनके बिना नहीं रह सकते हैं. वे हमें कागज, लकड़ी और लकड़ी दे. इमारती लकड़ी के घरों, रेल डिब्बों, बड़े बक्से, उपकरण आदि कागज जीवन के बिना हमारे लिए मुश्किल हो सकता है बनाने में प्रयोग किया जाता है. कागज अध्ययन और लेखन के लिए आवश्यक है. गांवों में लोग जलाऊ लकड़ी का उपयोग करने के लिए भोजन पकाना. वे लकड़ी का उपयोग करने के लिए घरों, झोपड़ियां, गाड़ियां, और कृषि उपकरण का निर्माण. पेड़ भी हमें गम, भोजन और दवा दे. वे भी जीवन की सुंदरता के लिए जोड़. गार्डन उनके बिना आकर्षक नहीं हो सकता. हम उन्हें ऑक्सीजन और अच्छे स्वास्थ्य के लिए की जरूरत है. पेड़ भी प्रदूषण को नियंत्रित करने में मदद: वे कार्बन डाइऑक्साइड अवशोषित. वे हमारे पर्यावरण में सुधार होगा. वे वर्षा के कारण और जमीन के नीचे जल संसाधनों की रक्षा. वे बाढ़ और सूखे को रोकने के. इसलिए, हम अपनी पूरी कोशिश करने के लिए अधिक से अधिक पेड़ हो जाना चाहिए. सरकार. और समाज कल्याण समाज आंदोलन शुरू कर देना चाहिए. वहाँ उन लोगों को जो अधिक से अधिक पेड़ बढ़ने के लिए पुरस्कार होना चाहिए.


Oct. 20, 2016

Fun joke

Fun joke

by RoorkeeWeb

दो जनों की शक्ल मिलती हो तो जुड़वाँ कहलाते हैं। पूरा परिवार ही हमशक्ल हो तो ?


Oct. 14, 2016

मेरे बचपन की यादें

मेरे बचपन की यादें

by Parul Mishra

बचपन के दिन किसी भी व्यक्ति के जीवन के बड़े महत्वपूर्ण दिन होते हैं । बचपन में सभी व्यक्ति चिंतामुक्त जीवन जीते हैं । खेलने उछलने-कूदने, खाने-पीने में बड़ा आनंद आता है ।

माता-पिता, दादा-दादी तथा अन्य बड़े लोगों का प्यार और दुलार बड़ा अच्छा लगता हैं । हमउम्र बच्चों के साथ खेलना-कूदना परिवार के लोगों के साथ घूमना-फिरना बस ये ही प्रमुख काम होते हैं । सचमुच बचपन के दिन बड़े प्यारे और मनोरंजक होते हैं ।

मुझे अपने बाल्यकाल की बहुत-सी बातें याद हैं । इनमें से कुछ यादें प्रिय तो कुछ अप्रिय हैं । मेरे बचपन का अधिकतर समय गाँव में बीता है । गाँव की पाठशाला में बस एक ही शिक्षक थे । वे पाठ याद न होने पर बच्चों को कई तरह से दंड देते थे । मुझे भी उन्होंने एक दिन कक्षा में आधे घंटे तक एक पाँव पर खड़ा रहने का दंड दिया था । इस समय मुझे रोना आ रहा था जबकि मेरे कई साथी मुझे देखकर बार-बार हँस रहे थे । मैं बचपन में कई तरह की शरारतें किया करता था ।

छुट्टी के दिनों में दिन भर गुल्ली-डंडा खेलना, दोस्तों के साथ धमा-चौकड़ी मचाना, फिाई का ढेला, ईंट आदि फेंककर कच्चे आम तोड़ना, काँटेदार बेर के पेड़ पर चढ़ना आदि मेरे प्रिय कार्य थे । इन कार्यो में कभी-कभी चोट या खरोंच लग जाती थी । घर में पिताजी की डाँट पड़ती थी मगर कोई फिक्र नहीं 9 अगले दिन ये कार्य फिर शुरू ।

किसी दिन खेत में जाकर चने के कच्चे झाडू उखाड़ लेता था तो किसान की त्योरी चढ़ जाती थी वह फटकार कर दौड़ाने लगता था । भाग कर हम बच्चे अपने-अपने घर में छिप जाते थे । कभी किसी के गन्ने तोड़ लेना तो कभी खेतों से मटर के पौधे उखाड़ लेना न जाने इन कार्यों में क्यों बड़ा मजा आता था । एक बार मैं अपने मित्र के साथ गाँव के तालाब में नहाने गया ।

उस समय वहाँ और कोई नहीं था । मुझे तैरना नहीं आता था । परंतु नहाते-नहाते अचानक मैं तालाब में थोड़ा नीचे चला गया । पानी मेरे सिर के ऊपर तक आ गया । मैं घबरा गया । साँस लेने की चेष्टा में कई घूँट पानी पी गया ।



शीघ्र ही मेरे मित्र ने मुझे सहारा देकर जल से बाहर खींचा । इस तरह मैं बाल-बाल बचा । इस घटना का प्रभाव यह पड़ा कि इसके बाद मैं कभी भी तालाब में नहाने नहीं गया । यही कारण है कि अब तक मुझे तैरना नहीं आता है ।

बचपन की एक अन्य घटना मुझे अभी तक याद है । उन दिनों मेरी चौथी कक्षा की वार्षिक परीक्षा चल रही थी । हिंदी की परीक्षा में हाथी पर निबंध लिखने का प्रश्न आया था । निबंध लिखने के क्रम में मैंने ‘चल-चल मेरे हाथी’ वाली फिल्मी गीत की चार पंक्तियाँ लिख दीं ।

इसकी चर्चा पूरे विद्यालय में हुई । शिक्षकगण तथा माता-पिता सभी ने हँसते हुए मेरी प्रशंसा की । परंतु उस समय मेरी समझ में नहीं आया कि मैंने क्या अच्छा या बुरा किया । इस तरह बचपन की कई यादें ऐसी हैं जो भुलाए नहीं भूल सकतीं । इन मधुर स्मृतियों के कारण ही फिर से पाँच-सात वर्ष का बालक बनने की इच्छा होती है । परंतु बचपन में किसी को पता ही कहाँ चलता है कि ये उसके जीवन के सबसे सुनहरे दिन हैं ।


Oct. 14, 2016

पेड़ हमारा जीवन

पेड़ हमारा जीवन

by Parul Mishra

धूप बरखा पाला सहता,
फिर भी कुछ न किसी से कहता।
हम पर छाया करता पेड़,
हमको फल देता है पेड़।



Oct. 14, 2016

एक ही है हमारा भगवान

एक ही है हमारा भगवान

by Parul Mishra

एक हमारे ईश्वर अल्लाह।
एक हमारे राम रहीम,
एक हमारे मंदिर मसजिद,
एक हमारे कृष्ण करीम।।


Oct. 6, 2016

श्री सरस्वती मंदिर आई. आई. टी. रूडकी

श्री सरस्वती मंदिर आई. आई. टी. रूडकी

by Parul Mishra

A Temple dedicated to the Goddess Saraswati, near the football field in Saraswati Kunj, IIT Roorkee.


Oct. 5, 2016

श्री 1008 आदिनाथ जिनंबिम्ब पचंकल्याणक प्रतिष्ठा महामहोत्सव

श्री 1008 आदिनाथ जिनंबिम्ब पचंकल्याणक प्रतिष्ठा महामहोत्सव

by Paras Jain

श्री 1008 आदिनाथ जिनंबिम्ब पचंकल्याणक प्रतिष्ठा महामहोत्सव
रूडकी मे होने जा रहा है यह अपने आप ने ही बहुत बडा महोत्सव होगा
इसमे हमे उपध्याय श्री नयन सागर जी का सानिध्य प्राप्त होगा. यह आयोजन 9 दिसम्बर से 14 दिसम्बर तक चलेगा
यह आयोजन रूडकी मे बने नये जैन मंदिर जी मे होगा जो आर्दश नगर मे बन रहा हे